
आइए आज सुनते हैं बहादुर शाह 'ज़फ़र' का क़लाम मोहम्मद रफ़ी साहब की आवाज़ में। सन १९६० में बनी फ़िल्म 'लाल किला' के इस गीत का संगीत तैयार किया था एस एन त्रिपाठी ने। राग मिश्र शिवरंजिनी पर आधारित इस गीत को रफ़ी साहब ने जिस ठहराव और नियंत्रण से गाया है वह उनकी ही प्रतिभा से सम्भव था। कहते हैं इस ग़ज़ल को बहादुर शाह 'ज़फ़र' ने रंगून में जेल की दीवार पर कोयले से लिखा था। रफ़ी साहब की गायकी ने अन्तिम मुग़ल बादशाह की तमाम निराशा को सजीव कर दिया है।