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Wednesday, September 17, 2008

मृगनयनी को यार


बनारस में प्रचलित लोकगीत विधाएं जैसे ठुमरी, कजरी, होरी, चैती और पूर्वी इत्यादि अक्सर शास्त्रीय और उपशास्त्रीय बंदिशों में सुनने को मिल जाती है पर आज ब्रज का लोकगीत 'रसिया' पंडित जसराज जी की आवाज़ में सुनिए। ब्रज जहाँ राधा और कृष्ण का अमर प्रेम जन-जन के, लोक के मन में गहरे तक बसा है। उसी प्रेम रस से सराबोर यह रचना जो मुझे बहुत पसंद है। आप को भी उम्मीद है पसंद आएगी-


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