जब एक दिन
सब कुछ रुक जाएगा
रुक जाएगा साँसों का तूफ़ान
रुक जाएगी धड़कन सीने की
जिस्म की हरारत
ठंडी पड़ जाएगी ।
जब वक्त की हथेली
तुम्हे ले लेगी
अपनी मजबूत गिरफ्त में।
तब जब मिट जाएगा
हर चिन्ह ।
और तुम डाल से टूटे
पत्ते की मानिंद
फ़िर न मिल पाओगे
कभी अपने अपनों से।
तब तुम्हारे साथ होगी बस
तुम्हारे अच्छे बुरे कामो की
फेरहिस्त ।
जो बोया होगा तुमने
काटोगे भी वही।