Thursday, January 14, 2010

वीडियो मौत


पुरानी पत्रिकाएं पलटते समय यह कविता एक बार फिर पढ़ने को मिली और कही भीतर तक छू गयी। के. अय्यप्पा पनिक्कर की एक मलयालम कविता जिसका यह अनुवाद १५ वर्ष पहले छापा था -मलयालम से अनुवाद किया था रति सक्सेना ने-






दीदी ! क्या अमेरिका से 'फोक्स' आया ?
'फोक्स' लोमड़ी ? देखती हूँ क्लिंटन है या कोई और।
अरे नहीं, क्लिंटन भैया को तो जानती हूँ,
वो कुछ टेलीग्राम जैसा होता है न!

अच्छा-अच्छा देखती हूँ ।
ये भाई का लेटर है .......... लो पढ़ लो।

'माई डियर सरो,
हमारी मदर कुछ सीरियस हैं,
लेकिन बूँदाबाँदी हो रही है,
अमेरिका की बूँदाबाँदी -
तुम क्या समझ पाओगी,
इसीलिये तो घर नहीं अ पा रहा।
मदर की मौत का वीडियो जरूर भेजना।
आख़िरी सांस से ले कर हमारे सारे क्रिया-करम,
'फ्यूनरल' फ्रेंड्स को बहुत पसंद है।
इन्डियन मैरिज, वेडिंग रिसेप्शन, सुहागरात,
हनीमून, डायवोर्स, सती-- सभी देख चुके हैं,
साँस उखड़ने के बाद के क्रिया-करम,
जैसे शव को नहलाना, नया कपड़ा ओढाना,
चावल मुँह में डालना, बलि,
जलती चिता, हँडिया फूटना आदि
देख नहीं पाए हैं।
इसलिए ये भी देखना चाहते हैं।
देखो 'ब्लैक एंड ह्वाईट' और 'कलर'
अलग-अलग लेना।
मर्लिन 'ब्लैक एंड ह्वाईट' पसंद करती है,
पर जैक्लिन का कहना है कि
कलर के बिना 'चिता-फिल्म' में मज़ा ही क्या?

वीडियो वाले को पहले से ही बुक कर लेना,
वीडियो समय पर नहीं मिला या-
अम्मा धोखा दे गई -- ऐसा मत कहना,
अच्छा कैसेट चाहिए तो यहीं से भेज दूंगा,
बरसात नहीं होती तो मैं ही आ जाता,
कैसेट बढ़िया बनाना चाहिए,
बहुतों को दिखाना है।

'डी लास्ट मोमेंट्स ऑफ एन इन्डियन मदर'
यही टाइटिल ठीक रहेगा,
शादी का वीडियो है ऐसा कन्फ्यूज़न नहीं होना चाहिए।
ग़मी में आये लोगों के चहरे पर भी
कैमरा घुमा देना,
क्रिसमस पर सभी दोस्त आयेंगे--
वीडियो देखने,
उससे पहले ही भेजना।

शेष फिर--वीडियो मिलाने पर,
अम्मा को भी ज़रा एडजस्ट करने को कहना,
क्रिसमस से पहले ही.........
बूँदाबाँदी की बात अम्मा को भी बता देना
टेक केयर !

(कवि की तस्वीर इन्टरनेट से साभार)

7 comments:

संजय भास्कर said...

behtreen sir ji......

Vivek Ranjan Shrivastava said...

मदर की मौत का वीडियो जरूर भेजना।
आख़िरी सांस से ले कर हमारे सारे क्रिया-करम,
'फ्यूनरल' फ्रेंड्स को बहुत पसंद है।
इन्डियन मैरिज, वेडिंग रिसेप्शन, सुहागरात,
हनीमून, डायवोर्स, सती-- सभी देख चुके हैं,
साँस उखड़ने के बाद के क्रिया-करम,
जैसे शव को नहलाना, नया कपड़ा ओढाना,
चावल मुँह में डालना, बलि,
जलती चिता, हँडिया फूटना आदि
देख नहीं पाए हैं।
इसलिए ये भी देखना चाहते हैं।
देखो 'ब्लैक एंड ह्वाईट' और 'कलर'
अलग-अलग लेना।
...sentimental...

sidheshwer said...

अच्छी कविता से रू-ब-रू कराया भाई आपने। हिन्दी ब्लाग्स की बनती हुई दुनिया के कारण उम्दा अनुवाद पढ़ने को मिल रहे हैं।
बनी रहे निरंतरता !

अशोक कुमार पाण्डेय said...

उफ़!

अमानवीयता का ऐसा भयावह चित्र!

हिमांशु । Himanshu said...

गज़ब की कविता पढ़ायी आपने !
रति जी क आभार अनुवाद के लिये !
आपका धन्यवाद ।

Prashant Nigam said...

Very touching, cannot believe people of this sort are alive in this world and can even utter out their weird feelings so eloquently. I wish God never allows me to meet such personalities. . .

Anjana (Gudia) said...

:-( kitna badal gaya insaan... achchi rachna...

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